78 साल बाद भी सिरोचा की किस्मत नहीं बदली, 66 के व्ही लाइन के सहारे 124 गांवों की बिजली व्यवस्था
सिरोचा, 22 जून 2026
प्रतिनिधि सुरेश तिपट्टीवार
देश को आज़ादी मिले 78 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन गडचिरोली जिले की सिरोचा तहसील आज भी वर्षों पुरानी 66 केवी विद्युत लाइन के भरोसे चल रही है। वर्ष 1966 में आलापल्ली से सिरोचा तक लगभग 100 किलोमीटर लंबी 66 केवी विद्युत लाइन बिछाई गई थी, जिसके माध्यम से आज भी सिरोचा तहसील के लगभग 124 गांवों को बिजली आपूर्ति की जाती है।करीब 60 वर्ष पुरानी हो चुकी इस लाइन के खंभे, तार, इंसुलेटर तथा अन्य उपकरण अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। आलापल्ली उपकेंद्र में स्थापित मशीनें भी अपनी क्षमता से अधिक भार झेल रही हैं। परिणामस्वरूप थोड़ी सी तेज हवा, बारिश या तूफान आने पर लाइन में बार-बार ब्रेकडाउन हो जाता है और पूरे सिरोचा क्षेत्र की बिजली व्यवस्था ठप पड़ जाती है।आज 22 जून 2026 को भी आलापल्ली से लगभग 18 किलोमीटर दूरी पर 66 केवी लाइन में तकनीकी खराबी आने से विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई। इससे तहसील के नागरिकों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।विदर्भ के अधिकांश जिलों और तहसीलों को समय के साथ 132 केवी एवं 220 केवी जैसी उच्च क्षमता वाली विद्युत लाइनों से जोड़ा गया है, जिससे वहां की बिजली व्यवस्था मजबूत हुई है। लेकिन सिरोचा तहसील आज भी 66 केवी लाइन पर निर्भर है। पिछले कई दशकों में अनेक सरकारें आईं और गईं, जनप्रतिनिधि बदले, अधिकारी एवं कर्मचारी बदले, लेकिन सिरोचा की विद्युत समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सिरोचा तहसील को 132 केवी या उससे अधिक क्षमता की नई विद्युत लाइन और आधुनिक उपकेंद्र से जोड़ा जाए, तो बार-बार होने वाले ब्रेकडाउन से राहत मिल सकती है तथा क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।अब सिरोचा वासियों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन्हें इस पुरानी और जर्जर 66 केवी लाइन की समस्या से स्थायी छुटकारा कब मिलेगा? नागरिकों ने शासन और विद्युत विभाग से शीघ्र ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि क्षेत्र की बिजली व्यवस्था भविष्य में सुचारू और विश्वसनीय बन सके।
- — ञिवेनी न्यूज़ ऐक्सप्रेस
“जनता की आवाज़, प्रशासन तक”
