तीन छात्राओं की मौत ने खोली आश्रम स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल!
सांप के डसने से तीन मासूमों की मौत; अब जांच के नाम पर खानापूर्ति नहीं, जवाबदेही तय करने की मांग
गढ़चिरोली, प्रतिनिधि।
धनोरा तालुका के जापतलाई स्थित सरकारी अनुदान प्राप्त आश्रम स्कूल में सांप के डसने से तीन छात्राओं की मौत की दर्दनाक घटना ने जिले की आश्रम स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन छात्राओं की जान चली गई और तीन अन्य छात्रों का इलाज चल रहा है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आश्रम स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यवस्था कहां थी?
सरकार की ओर से आश्रम स्कूलों को अनुदान दिया जाता है। विद्यार्थियों के रहने, भोजन, स्वास्थ्य और सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित संस्था एवं प्रबंधन पर होती है। इसके बावजूद यदि छात्राओं के आवासीय परिसर में सांप के पहुंचने जैसी स्थिति बनी और उससे तीन मासूमों की जान चली गई, तो क्या सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच होती थी? क्या छात्रावास परिसर में जहरीले जीव-जंतुओं से बचाव के पर्याप्त इंतजाम थे? क्या रात के समय विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद थे?
इन सवालों का जवाब अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जांच के जरिए सामने आना चाहिए।
घटना के बाद जागा प्रशासन, पहले क्यों नहीं हुई जांच?
घटना के बाद नासिक और नागपुर स्थित जनजातीय विकास आयुक्त कार्यालय की टीमें घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंच रही हैं। प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई का भरोसा दिया है।
लेकिन सवाल यह भी है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही सरकारी व्यवस्था जागेगी?
आश्रम स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए नियमित निरीक्षण, भवन की स्थिति की जांच, परिसर की साफ-सफाई, झाड़ियों की कटाई, सांप एवं अन्य जहरीले जीवों से बचाव तथा आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की नियमित समीक्षा क्यों नहीं की गई—यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
तीन मासूमों की मौत; अब जिम्मेदारी निश्चित होगी क्या ?
प्रशासन के अनुसार घायल तीन छात्रों को तत्काल विषनाशक दवा दी गई है और उनकी हालत पर स्वास्थ्य विभाग नजर रख रहा है। जिला कलेक्टर ने उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए हैं।
जिला सह-संरक्षक मंत्री एडवोकेट आशीष जायसवाल ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मृतक छात्राओं के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और घायल विद्यार्थियों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मगर परिवारों के लिए केवल संवेदना पर्याप्त नहीं है।
जिन तीन परिवारों ने अपनी बेटियां खोई हैं, उन्हें न्याय चाहिए और यह जानने का अधिकार है कि इस हादसे के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है?
‘सरकारी अनुदान’ है तो सुरक्षा की जवाबदारी भी सरकार की निगरानी में होनी चाहिए
आश्रम स्कूलों में गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चे शिक्षा के लिए रहते हैं। उनके माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य की उम्मीद से इन संस्थाओं में भेजते हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं हो सकती।
जांच में यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी, नियमों की अनदेखी, प्रबंधन की लापरवाही या संबंधित अधिकारियों की निगरानी में चूक सामने आती है, तो जिम्मेदारी केवल छोटे कर्मचारियों पर डालकर मामला खत्म नहीं किया जाना चाहिए।
जिस स्तर पर लापरवाही हुई है, उसी स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
अब जांच सिर्फ रिपोर्ट तक सीमित न रहे
जापतलाई की घटना ने पूरे जिले के आश्रम स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ऑडिट कराने की जरूरत सामने ला दी है।
प्रशासन को जिले के सभी आश्रम स्कूलों में तत्काल निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि—
विद्यार्थियों के छात्रावास सुरक्षित हैं या नहीं।
जहरीले सांप एवं अन्य जीव-जंतुओं से बचाव के इंतजाम हैं या नहीं।
परिसर में झाड़ियां और गंदगी तो नहीं है।
रात के समय पर्याप्त सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था है या नहीं।
प्राथमिक उपचार और विषनाशक दवाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
आपातकालीन स्थिति में अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था है या नहीं।
स्कूल प्रबंधन द्वारा सुरक्षा संबंधी नियमों का नियमित पालन किया जा रहा है या नहीं।
जापतलाई की तीन छात्राओं की मौत को केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना मानकर फाइल बंद करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी विफलता होगी।
यह घटना चेतावनी है—आज जापतलाई है, कल किसी दूसरे आश्रम स्कूल में ऐसी त्रासदी न हो, इसके लिए अब कार्रवाई जरूरी है।
तीन मासूमों की मौत का हिसाब कौन देगां
जांच हो, जिम्मेदारी तय हो और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई हो—यही मृत छात्राओं के परिवारों के प्रति सच्ची संवेदना होगी।
