मंदिरों तक पहुंचने वाले रास्ते गंदगी से पटे, आस्था पर नगर पंचायत की लापरवाही भारी!
सिरोंचा के महाकाली और ग्रामदेवी पोशम्मा मंदिर जाने वाले श्रद्धालु परेशान; पूजा-पाठ से पहले गंदगी से दो-चार हो रहे भक्त
प्रतिनिधि | सिरोंचा
सिरोंचा शहर में इन दिनों धार्मिक आस्था का माहौल है। शहरवासी महाकाली मंदिर और ग्रामदेवी पोशम्मा मंदिर में माता टेकने, पूजा-अर्चना करने और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर मन्नतें चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। लेकिन मंदिरों तक पहुंचने वाले रास्तों की बदहाल स्थिति श्रद्धालुओं की आस्था पर भारी पड़ रही है।
भक्तजन सुबह-सुबह स्नान कर, पूजा की पूरी तैयारी के साथ मंदिर के लिए निकलते हैं। लेकिन मंदिर के रास्ते पर पहुंचते ही उन्हें गंदगी, कचरा और अस्वच्छ वातावरण का सामना करना पड़ रहा है। जिस रास्ते से श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति के साथ मंदिर पहुंचना चाहते हैं, वही रास्ते नगर पंचायत की कथित अनदेखी के कारण परेशानी का सबब बने हुए हैं।
आस्था के रास्ते पर गंदगी का अंबार, जिम्मेदारों की आंखों पर पट्टी?
मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों की नियमित साफ-सफाई करना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले मार्गों पर गंदगी का बने रहना नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत प्रशासन और संबंधित वार्ड के जनप्रतिनिधि मंदिर मार्ग की इस समस्या से परिचित होने के बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं। आखिर जिस रास्ते से रोजाना श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं, उस रास्ते की सफाई के लिए नगर पंचायत को किसका इंतजार है?
श्रद्धालुओं में नाराजगी, प्रशासन से तत्काल सफाई की मांग
धार्मिक स्थलों पर जाने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। पूजा-पाठ के लिए आने वाले महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों को गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़े, यह स्थिति सिरोंचा जैसे शहर के लिए निश्चित रूप से चिंताजनक है।
श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने नगर पंचायत प्रशासन से मांग की है कि महाकाली मंदिर और ग्रामदेवी पोशम्मा मंदिर की ओर जाने वाले सभी रास्तों की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए, कचरा हटाया जाए और नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
आस्था के केंद्रों की ओर जाने वाले रास्ते अगर गंदगी से भरे रहेंगे, तो फिर नगर पंचायत की स्वच्छता व्यवस्था के दावों का क्या मतलब?
अब देखना यह है कि श्रद्धालुओं की परेशानी को नगर पंचायत प्रशासन गंभीरता से लेता है या फिर गंदगी के बीच भक्तों की आस्था यूं ही दम तोड़ती रहेगी।
