किसानों की पिडा तकलीफ कब तक
मद्दीकुंठा–जानमपल्ली के किसानों का फूटा गुस्सा; कृषि उत्पन्न बाजार समिति के गोदामों में आखिर चल क्या रहा है?
सिरोंचा :
धान बेचने के लिए सिरोंचा तहसील के खरीदी केंद्रों पर पहुंच रहे किसानों की परेशानी अब आक्रोश में बदलती दिखाई दे रही है। मद्दीकुंठा और जानमपल्ली गांव के किसानों ने कृषि उत्पन्न बाजार समिति प्रशासन और कथित “भोगस कारोबार” पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए जिलाधिकारी गडचिरोली को तीखा निवेदन सौंपा है।
किसानों का आरोप है कि जिन कृषि गोदामों का उपयोग किसानों के धान भंडारण के लिए होना चाहिए था, वही गोदाम निजी लोगों को किराये पर देकर किसानों के हक पर डाका डाला जा रहा है। धान खरीदी केंद्र शुरू होने के बावजूद किसानों को अपना धान खुले में रखने की नौबत आ रही है।
किसानों ने सवाल उठाया है कि आखिर किसानों के लिए बनाए गए गोदाम निजी लोगों को किसके आदेश से दिए गए? किस नियम के तहत यह पूरा खेल चल रहा है? और जब किसानों ने बार-बार शिकायत की, तब संबंधित अधिकारियों ने चुप्पी क्यों साध रखी?
क्षेत्र के आदिवासी और गरीब किसान बड़ी उम्मीद के साथ धान लेकर खरीदी केंद्र पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां पर्याप्त भंडारण व्यवस्था नहीं होने से उन्हें घंटों इंतजार, अव्यवस्था और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही और बाजार समिति के कथित मनमाने रवैये के कारण किसान मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं।
निवेदन में किसानों ने मांग की है कि कृषि उत्पन्न बाजार समिति के गोदामों की तत्काल जांच की जाए, निजी व्यक्तियों को दिए गए गोदाम तुरंत खाली कराए जाएं और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। किसानों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
4 जून 2026 को सिरोंचा में जिलाधिकारी के नाम सौंपे गए इस निवेदन के बाद अब पूरा मामला चर्चा का विषय बन गया है। किसानों के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है —
“किसानों की पीड़ा आखिर कब तक?”
